भावतारंगिनी में ढूँढें

शुक्रवार, 2 जुलाई 2010

अरुण यह मधुमय देश हमारा - जयशंकर प्रसाद

अरुण यह मधुमय देश हमारा।
जहाँ पहुँच अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा।।
सरल तामरस गर्भ विभा पर, नाच रही तरुशिखा मनोहर।
छिटका जीवन हरियाली पर, मंगल कुंकुम सारा।।
लघु सुरधनु से पंख पसारे, शीतल मलय समीर सहारे।
उड़ते खग जिस ओर मुँह किए, समझ नीड़ निज प्यारा।।
बरसाती आँखों के बादल, बनते जहाँ भरे करुणा जल।
लहरें टकरातीं अनन्त की, पाकर जहाँ किनारा।।
हेम कुम्भ ले उषा सवेरे, भरती ढुलकाती सुख मेरे।
मंदिर ऊँघते रहते जब, जगकर रजनी भर तारा।। - जयशंकर प्रसाद

स्वप्न मंजूषा 'शैल' द्वारा जयशंकर प्रसाद की यह कविता का सुरबद्ध और संगीतबद्ध रूप

आभार: हिन्दयुग्म  ( http://podcast.hindyugm.com/2009/06/music-in-chhayavaad-kavi-jaishankar.htm )

5 टिप्‍पणियां:

  1. अरुण यह मधुमय देश हमारा।
    जहाँ पहुँच अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा।।
    सरल तामरस गर्भ विभा पर, नाच रही तरुशिखा मनोहर।
    छिटका जीवन हरियाली पर, मंगल कुंकुम सारा।।
    लघु सुरधनु से पंख पसारे, शीतल मलय समीर सहारे।
    उड़ते खग जिस ओर मुँह किए, समझ नीड़ निज प्यारा।।
    बरसाती आँखों के बादल, बनते जहाँ भरे करुणा जल।
    लहरें टकरातीं अनन्त की, पाकर जहाँ किनारा।।
    हेम कुम्भ ले उषा सवेरे, भरती ढुलकाती सुख मेरे।
    मंदिर ऊँघते रहते जब, जगकर रजनी भर तारा।।

    उत्तर देंहटाएं
  2. Mr. Ankit jhahil too hoo hi gawar v hoo,Google me meaning nikaal loo

    उत्तर देंहटाएं
  3. Mr. Ankit jhahil too hoo hi gawar v hoo,Google me meaning nikaal loo

    उत्तर देंहटाएं

हाल के पोस्ट

पंकज-पत्र पर पंकज की कुछ कविताएँ

पंकज के कुछ पंकिल शब्द